“प्रेमसभा”

(1- वैष्णव देवी का bat )

राज मुझसे एक साल का जूनियर है पर उसके सामने मैं ख़ुद को हमेशा छोटा ही समझता हूँ ।
उसकी height स्कूल के वक़्त मुझसे थोड़ी सी बड़ी थी , दिखने में वो tom cruise का indian synonyms था, उसके बाल बड़े और घुघराले थे।
राज की fan following बहुत थी जिसके कारण उसके अगल बगल हमेशा 2 4 लड़के होते जिनमे मैं भी था , उसने सबको काम बाट रखा था, जैसे मेरा काम था कि उसे सुबह स्कूल के लिए आकर उठाना और शाम को उसका MRF का bat लेकर क्रिकेट ground तक पहुँचना ।
वैसे राज के BAT के दीवाने पूरे मुहल्ले के लड़के थे क्योंकि उसका bat वैष्णव देवी के मंदिर से आया था जिसके कारण उसमे बहुत स्ट्रोक था हम मानते थे की उस bat में देवी की शक्ति है इसलिए राज खूब बड़े बड़े छक्के मारता है पर उसके bat से खलेने का अवसर ख़ुद राज के अलावा किसी और को प्राप्त नहीं हुआ था..
वो ज्यादातर अपना वक़्त चाणक्य की फोटो पर अगरबत्ती देने, प्रेम से संबंधित अंग्रेज़ी फिल्मे देखने और चाणक्य की नीतिया पढ़ने में देता था उसकी इस मेहनत,लगन और चाणक्य के प्रति इतनी निष्ठा भाव देखकर सब ने उसे अपना love गुरु बना लिया था ।
हमारे मुहल्ले में आज जितने भी लड़के relationship में थे सब राज के दिये गये उपदेशो का अनुकरण कर के सफल हुए थे । उसका मानना था की अगर आप प्रेम संबध को कई दिनों तक सुरक्षित रखना चाहते है तो आपकी प्रेमिका की उम्र आपसे बड़ी होनी चाहिए
क्रिकेट खेलने के बाद एक “प्रेमसभा” बैठती जिसमे सबकी परेशानियों का राज निवारण करता ,चाहे वो प्रेमिका से झगड़ा हो या किसी लड़की से प्रेम की समस्या, परंतु अगर कोई भी राज के सामने अपनी प्रेमिका या होने वाली प्रेमिका को gf बोल देता तो वो भड़क उठता उसका मानना था कि
Gf पैसे, चॉकलेट लेकर उड़ जाती है और एक प्रेमिका आपको बस प्रेम करती है ।
राज को बॉलीवुड की फिल्मे बहुत कम ही पसन्द थी हालाँकि ये बात अलग है कि
DDLJ देखने के बाद ही उसके चाचा ने उसका नाम रखा था ,इस बात का उसे कहीं ना कहीं घमण्ड था पर उसे DDLJ और शाहरुख दोनो ही पसंद नहीं थे ,लेकिन उसे सनी देओल कि फिल्मे बहुत पसंद थी जिनमे जीत, जानी दुश्मन ,गदर का नाम सबसे ऊपर आता था ।
एक शाम मैं क्रिकेट ground पे थोड़ा देरी से पहुँचा तो मुझे एक झटका लगा और ये झटका किसी चमत्कार से कम नहीं था मैंने देखा कि राज के बैट से चीकू बैटिंग कर रहा है और राज पूरे ground पर नज़र नहीं आरहा था, सबसे पूछने के बाद पता चला कि वो “प्रेमसभा” वाले स्थान के पास है ।
वैसे हमारी प्रेमसभा एक बरगद के पेड़ की नीचे बैठती, राज का मानना था कि जिस तरह जानी दुश्मन फिल्म में एक बरगद के पेड़ ने सदियो के बाद वसुंधरा और कपिल को मिलाया था ठीक वैसे ही सबकी प्रेम समस्या का समाधान ये बरगद का पेड़ ज़रूर करेगा और एक दिन उसकी वसुंधरा भी उसे इसी पेड़ के नीचे मिलेगी।
मैं दौड़ कर उसके पास गया तो मैंने देखा राज पेड़ के नीचे शांत बैठकर ज़मीन से घास तोड़ रहा था । राज को पहले मैंने इतना शांत कभी नहीं देखा था ,
उसके पीठ पर हाथ रखते हुए मैंने पूछा
क्या हुआ..?
उसने कोई जवाब नहीं दिया तो मैं वहा चुप चाप उसके बगल में बैठ गया दोनो कुछ देर शांत बैठे रहे फिर राज ने अपने पास में पड़े पत्थर को फेकते हुए कहा ..
यार ये सुधा मेरे लिए inception बनती जा रही है क्या करु.

(2-वसुंधरा )

मैं समझ गया था कि मुझे लेकर अमित पांचवा लड़का बन चुका है जो राज से प्रेम उपदेश लेकर भी सुधा को अपनी प्रेमिका बनाने में असफल रहा ।
मैंने तुमसे कुछ पूछा है शुभम ..? ‘राज ने हार की नज़र से मेरी तरफ देखते हुए कहा”
मैं तो ख़ुद इस मामले में हताश और लाचार हूँ ।
एक बात कहूँ किसी से बोलोगे तो नहीं..? “राज ने घास में लेटकर आसमान को देखते हुए कहा”
बोलो,
कही सुधा ही तो मेरी वसुंधरा नहीं है..? क्योंकि अमित प्रेम के मामले में हमारे मुहल्ले का सबसे क्रांतिकारी लड़का है उसका भी आज असफल होना कहीं ना कहीं कामदेव का मेरे लिए एक संकेत है।

वो तुम्हारी वसुंधरा है या नहीं पर तुम्हारी असफलता ज़रूर है ”ये बात मैंने राज के बैट से ना खेलपाने की जलन से बोली थी “..
यार मैंने चार बार की नाकामी के बाद अमित को चाणक्य नीति पढ़ा कर समझाया था “एक परेशान आवाज़ में राज ने कहा”
हम्म… तो क्या सोचा है..? एक चुप्पी के बाद मैंने कहा ।
ठंडी की छुट्टियां कब से है..?
22 तारीख़ से क्यों..?
आज 1 तारीख़ है मतलब मेरे पास 20 दिन और है ..
कहना क्या चाहते हो..?
अच्छा वो फेसबूक पे तुम्हारी फ़्रेंड है क्या..?
हाँ है ना पर बहुत कम online आती है “मैंने एक दर्द के साथ कहा”
चलो उठो सायबर कैफे चलते है “राज ने उठ कर अपना पैंट साफ करते हुए कहा”
अभी..?
नहीं तुम्हे पीटने के बाद ,
चलो चलो चलो “ मैंने डर से एक साँस में कहाँ”…
और फिर हम राज की नीली cycle की घंटी बजाते हुए रिंकू भइया के सायबर कैफे पहुँच गये ।
मैंने राज का fb account बनाया ,dp में राज ने जीत फिल्म के सनी देओल की फोटो लगाई और अपनी प्रोफाइल को अच्छे से सजाया धजाया…
और अंत में दूसरे tab में चाणक्य देवता की फोटो के पैर छू कर उसने सुधा को फ़्रेंड request भेज दिया ।
मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो एकता कपूर के धारावाहिको की तरह मैं राज का नया जन्म देख रहा हूँ ,क्योंकि आज उसने facebook पे कभी ना आने की कसम तोड़ दी थी ।
हम वापस घर आ गये, कुछ दिनों में वक़्त इतना बदला गया की पता ही नहीं चला, राज स्कूल में इंटरवल होने पर मेरे क्लास में आजाता और सुधा को देखता रहता ,शाम को खेलने की जगह ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त सायबर कैफे में सुधा की प्रोफाइल को देखने में लगाता , शायद वह सुधा में अपनी वसुंधरा को देखने लगा था ।
और एक शाम वो चमत्कार हो ही गया जिसका हम दोनो को इंतेज़ार था ।

( 3-Eden park VS melbourne )

सुधा की प्रोफाइल खोलने पर मुझे अब राज का नाम mutual फ़्रेंड में दिखने लगा था, अगर आप ये सोच रहे कि राज मेरे फेसबूक प्रोफाइल से भी तो सुधा से बात कर सकता था तो आप को बता दूँ राज लड़कियों के मामले में
First impression is last impression law पर अपने MRF के bat से भी ज़्यादा भरोसा करता था..
सुधा को friend request accept किये दो दिन हो चुके थे पर राज ने अभी तक उसको कोई भी message नहीं किया था ।
एक सुबह जब हम स्कूल के बस स्टॉप पे जा रहे थे तो राज से मैंने पूछा
कुछ बात हुई..?
नहीं
क्यों..?
क्योंकि न्यूज़ीलैंड के Eden Park में खेलने और ऑस्ट्रेलिया के Melbourne में खेलने में फर्क है ।
इस जवाब से मैं समझ गया था कि पिछले 5 असफलताओ के बाद उसने सुधा के चरित्र पर इस बार गहन अध्ययन किया है ।
सुधा मेरे class की ऐसी ख़ूबसूरत लड़की है जिसे पाने की नाकाम कोशिश मेरे क्लास के सभी लड़को ने किया है यहाँ तक मैंने भी
ये अलग बात है रक्षाबंधन के एक दिन पहले सुधा ने मुझे राखी बांध कर मेरे दिल में उसके लिए पनपते नवजात प्रेम की भ्रूण हत्या कर दी थी ।
जब हम अपने बस स्टॉप पे पहुँचे तो राज ने कहाँ,
अबे ये सुधा ही है या फिर मुझे प्यार हो रहा है..?
हाँ ये सुधा ही तो है पर हमारे बस स्टॉप पे क्या कर रही है..
हम्मम्मम्म ….देखो भाई तो तुम बन ही गये हो…अब बहन के पास चल कर अपने जीजा जी के परेशानी का समाधान करो ,” राज ने मेरे कंधे पे हाथ रखते हुए कहा”
जब हम सुधा के करीब पहुँचे तो हमने देखा उसके पापा भी साथ आये थे ,शायद सुधा की बस छूट गई थी । पापा को देखते ही जीजा और साले दोनो बिना किसी औपचारिकता के उनके पैरो में संजीवनी बूटी खोजने कूद पड़े। आशीर्वाद लेकर जब हम खड़े हुए तो सुधा ने हमे उनसे introduce कराया और तब तक हमारी बस आ चुकी थी।

हमारे बस स्टॉप पे चढ़ने वाले बच्चो को अमूमन कभी सीट नहीं मिलती क्योंकि यहाँ कोई आरक्षण नहीं चलता था और ना ही advance booking बुकिंग होती थी पर राज के लिए एक सीट हमेशा खाली रहती जिसको उसने एक अजीब से शर्माने वाले expression के साथ सुधा को दे दिया था ।
सुधा और राज के बीच आंखों के खेल की शुरुवात हुई ही थी कि हम स्कूल पहुँच गये ।
ये सब देखकर मुझे अहसास हो गया था कि राज melbourne में बैटिंग करने उतर चुका है ।
कुछ घंटे पढ़ने के बाद जब इंटरवल हुआ तो कैंटीन में भीड़ के कारण समोसे ना खरीद पाने के दुःख से सुधा अपने दोस्तो के साथ एक कोने में उदास खड़ी थी तभी मैंने देखा राज एक मसीहा की तरह उसके हाथ में समोसा देकर मुस्कुरा कर चला गया …
सुधा ने उसे अवाज़ दी
पर राज ने जानबूझकर उसे अनसुना कर दिया ..
“प्रेमसभा” में राज ने 2 महीने पहले इस परिस्थिति के बारे में
हमे समझया था और आज मैने अपनी आँखों से इसका practical भी देख लिया था..
स्कूल से घर आते ही बैग फेकने के बाद हम साइबर कैफे में पहुँच चुके थे । राज ने कहाँ था कि आज वो सुधा को message करेगा, मैं इस बात को लेकर excited था कि मुझे पता चलेगा राज लड़कियों से कैसे और क्या बाते करता है जिसे मैं अपनी निजी ज़िंदगी में apply करने वाला था ।
पर जैसे ही राज ने अपना account खोला तो मैं सचिन की तरह
nervous 90s में चला गया मैंने देखा सुधा का मैसेज था
“Thankyou raj”

(4- “patience and attitude”)

सुधा का message देख कर मैं समझ गया था कि राज अपनी ज़िन्दगी में कुछ ज़रूर बड़ा करेगा ।
पर उसने सुधा को कोई reply नहीं दिया, ये देखकर मुझे राज के द्वारा दिये गये 3 दिन के पहले का उपदेश याद आ गया जिसमे उसने
Patience और attitude पर जोर देते हुए कहा था ,
“ Patience and attitude can get you everything that you want ”
इस line को सुनते वक़्त मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया पर अब वही line मेरे कानो में राज की अवाज़ में गूंज रही थी ।
सुधा उन घरो से थी जहाँ बच्चो को पढ़ाई के लिए birthday पे लैपटॉप गिफ्ट देने का ट्रेंड चल रहा था और वही मैं और राज उन घरो से थे जहाँ बच्चो को birthday पर स्कूल में 1रुपये की दो टॉफी बांटने पर जोर दिया जाता …
मैंने आपको ये बात इसलिए बताई क्योंकि सुधा के नाम के आगे अब हरी बत्ती जल रही थी यानी उसके पास ख़ुद का laptop था ।
मैंने देखा की सुधा ने राज को एक और message किया है पर राज उसे open कर के देख नहीं रहा था । राज का इतना patience देख कर मैं अपना patience खो बैठा और mouse से message खोल दिया ..
– Are you busy..?
मैंने इतना ही देखा होगा की राज ने मेरे गाल पर एक झापड़ रसीद दिया और मुझे घर जाने को कहा ..
मैं पिल्ले की तरह रोने की अवाज़ के background के साथ घर आया.
और सीधे पूजा के कमरे में जाकर गीता पे हाथ रख कर कसम खाई की अब राज से कभी नहीं मिलूंगा ,पर जैसे चींटी मीठे को देख कर उसके आगे पीछे घूमने लगती है ठीक वैसा ही हाल मेरा राज को देखकर होता, इसलिए लोहा चूम कर अगले ही दिन मैंने कसम को उतार लिया था ।
राज मुझे अपने साथ अब साइबर कैफे नहीं ले जाता हालाँकि मैंने तमाम कोशिशें की ये जानने के लिए कि वो और सुधा क्या बाते करते है पर मुझे हमेशा असफलता प्राप्त हुई ..
राज ना ही अब क्रिकेट खेलने आता और ना ही प्रेमसभा में उपदेश देने, उसको इतने बड़े mission पर देखकर मुहल्ले के लड़को ने मुझे कुछ दिन के लिए प्रेमसभा का उपदेशक बना दिया ..
जैसे राज चाणक्य नीतियों की किताबे पढ़ कर सबको सलाह देता ठीक वैसे ही मैंने राज कि नीतियों का एक कॉपी बनाया था जिसका अनुकरण कर के मैंने जैसे तैसे प्रेमसभा को संभाला ….
एक शाम जब हम स्कूल से घर आये तो राज ने मुझसे कहा कि जल्दी तैयार हो जाओ हमे कही चलना है ,राज को ये कहने की देरी थी और मैं उसके cycle के पीछे बैठ चुका था । उसने जब कहा की हम सुधा के घर जा रहे है तो मुझे बड़ा अफसोस हुआ कि राज की बात को मान लेनी चाहिए थी, ऐसे स्कूल के यूनिफॉर्म में नहीं निकलना चाहिए था ।
सुधा के घर पहुँचने से पहले राज ने मार्केट से biscuit का पैकेट लिया और मुझे cycle देकर एक बूढ़े रिक्शेवाले के रिक्शे पर बैठ गया ,मुझे ये मामला trigonometry के सवालो से ज़्यादा मुश्किल लग रहा था ।
जब हम सुधा के घर पर पहुँचे तो राज ने मुझसे कहा कि उसके के घर का door bell बजा कर भाग जाओ , मेरे कुछ समझ में नहीं आरहा था पर राज का कहना ना मानना प्रेमसभा के नियमो का उलंघन करना था , तो मैंने ठीक वही किया । सुधा के घर का door bell बजाया और cycle के साथ पड़ोस वाले घर के पीछे छिप गया …
फिर जो हुआ उसके लिए राज को भारतरत्न का सम्मान देना भी छोटा लगता ।
मैंने देखा , राज ख़ुद रिक्शा चला रहा है और बूढा रिक्शेवाला पीछे बैठकर biscuit खा रहा था । जबतक सुधा ने अपने घर का गेट खोला राज रिक्शा लेकर उसके घर के सामने पहुँच चुका था ,सुधा की नज़र राज पे पड़ी तो उसने राज को आवाज़ दी पर इस बार भी वो सुधा को अनसुना कर के रिक्शा लेकर आगे जा चुका था…

(5- हैप्पी birthday )

वहा से निकल कर हम सायबर कैफे आगये, तो राज ने मुझे बताया कि सुधा को बूढ़े रिक्शो वालो पर बहुत दया आती है और आज शाम वह घर पर अकेली थी इसलिए ये सुधा को आकर्षित करने का सबसे सही मौका था …
राज ने जब अपना facebook account खोला तो मैं फिर से एक बार सचिन की तरह nervous 90s का शिकार हो गया, मैंने देखा सुधा ने message किया था…
– आज मैंने तुमको अपने घर के पास देखा, by the way तुम बूढ़े रिक्शेवाले को बैठा के रिक्शा चला रहे थे ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा मैंने तुम्हे आवाज़ दी पर तुमने शायद सुना नहीं ।
-हाँ वो मैं अपने एक दोस्त से मिलने गया था , और वो बूढ़े रिक्शेवाले uncle बीमार थे तो मुझे अच्छा नहीं लगा
राज को इतनी शराफत से बात करता देख मुझे डर लगने लगा , अगर मैं दो minute तक उसका ये रूप और देखता तो ,तेरे नाम फिल्म का इंटरवल के बाद वाला राधे बन जाता इसलिए मैं उठ कर बाहर चला गया ।
22 तारीख़ आने में अभी 5 दिन और बचे थे ।
पर अभी भारत का सबसे बड़ा घोटाला होना बाकी था, और वो घोटाला ये था कि सुधा के लिए राज का birthday 20 दिसम्बर को फिर से आने वाला है ..
जब मैंने राज से पूछा कि
-अगर सुधा को पता चल गया कि तुम्हारा birthday 7 august को है तब..?
-कौन बोला मेरा birthday 7 august को है ..?
राज के इस जवाब ने मुझे शांत कर दिया। मैं समझ चुका था कि उसे जंग जीतने में एक या दो दिन और बचे है ,शाम को प्रेमसभा की मीटिंग हुई सबको बताया गया कि राज का birthday 7 अगस्त को नहीं अब 20 दिसम्बर को मनाया जायेगा ।
19 दिसम्बर की chat में सुधा ने राज से कहा कि
– तुम्हे अपने birthday पर क्या गिफ्ट चाहिए ..?
– तुम मुझे वो नहीं दे सकती..
– क्यों ज्यादा महंगा है..?
– हाँ
-पर क्या..?
– तुम्हारा कीमती वक़्त
-मतलब..?
– क्या तुम कल मेरे birthday पर मिल सकती हो..?मुझे तुमसे कुछ कहना है
-मुझे भी तुमसे कुछ कहना है राज
– ठीक है फिर कल शाम उमानाथ क्रिकेट ground के पीछे आजाना
– पर वहा क्यों तुम मेरे घर आजाओ ना mummy papa को तुम्हारे बारे में पता है
– नहीं वो जगह मेरे लिए बहुत lucky है..
– तो ठीक है कल मैं आ जाऊँगी..
– ok bye tc
– bye You too
ये अमीर घर में बच्चे कितने lucky होते है ना जिनके mummy papa को पता होता है कि एक लड़की का लड़का भी दोस्त होता है पर अगर हमारे घर ये पता चल जाये कि हमारी दोस्ती लड़कियों के साथ भी है तो mummy को तो फिर भी समझाया जा सकता है पर papa सूर्यवंशम फिल्म के ठाकुर भानु प्रताप बन जाते है।
ख़ैर, 20 दिसम्बर आ ही गया सभी प्रेमसभा के सदस्यो ने राज को birthday की बधाई दी, और राज ने घोषणा किया कि आज प्रेमसभा के साथ क्रिकेट मैच भी बंद रहेगा..
शाम होते ही मैं और राज प्रेमसभा वाले स्थान पर पहुँच गये.. यानिंकि उस बरगद के पेड़ के नीचे जहाँ राज को आज उसकी वसुंधरा सचमुच में मिलने वाली थी…

(6- बीस दिसम्बर )

घड़ी में 4:30 हुए ही थे कि मैंने देखा cricket ground में एक कार आकर रुकती है जिसमे से सुधा उतरकर किसी नागिन की तरह दौड़ते हुए राज की तरफ भागी आ रही थी।
ना जाने कहाँ से बरगद के पेड़ से मुझे जानी दुश्मन फिल्म का गाना “आजा आ आ…आजा” साफ सुनाई दे रहा था ।
मैं वहा से जाने लगा तो राज ने कहाँ नहीं तुम साथ रुको..
राज ने ऐसा क्यों कहा ये मैं समझ पाता उससे पहले
सुधा हमारे पास आगयी और गाना बंद होगया ।
राज और सुधा कुछ देर एक दूसरे को देखते रहे फिर सुधा ने कहा
– Happy birthday राज
– Thanks
– ये लो तुम्हारा गिफ्ट
– राज ने गिफ्ट लेकर मुझे दिया और फिर से थैंक्स कहा
– सुनो सुधा और शुभम मुझे तुम दोनो से कुछ कहना है
– हाँ कहो मैंने और सुधा ने साथ में कहा
– मैं हमेशा हमेशा के लिए जौनपुर छोड़ के मिर्ज़ापुर जा रहा हूँ मेरे पापा की पोस्टिंग वहा हो गई हम आज रात 7 बजे ही निकल रहे
– क्या..? मैंने सुधा ने साथ में कहा
– पर तुमने पहले क्यों नहीं बताया ,” मैंने अपनी औकात से ज़्यादा गुस्से में कहा”
– अगर बता भी देता तो क्या कर लेते रोक पाते..? सुनो
मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ सुधा
– मुझे भी तुमसे कुछ कहना है राज
– I love you
– सच में तुम भी यही कहने वाले थे oh my god , I love you to raj इतना बोलते ही सुधा ने राज को गले से लगा लिया और रोते हुए कहा तुम मत जाओ ना
– अरे तुम रो क्यों रही हो..? “उसकी शकल आगे कर के देखते हुए राज ने कहा”
– तो क्या करु खुश होकर नाचू कि तुम जा रहे, देखो तुम जौनपुर आते रहना तुम जब कहोगे मैं अपनी कार भेज दूंगी ।
– हाँ ठीक है ।
– क्या ठीक है कुछ भी ठीक नहीं है ये बोल कर सुधा ने फिर से रोते हुए राज को गले लगा लिया ।

राज ने मेरी तरफ देख कर आँख मारी , और मैं समझ गया कि राज ने melbourne पे शतक मार दिया है यानी की 5 नाकाम कोशिशो के बाद सुधा अब उसकी थी..
उसने सुधा को ख़ुद से अलग किया और जाने को कहा ..
सुधा हमसे कुछ देर बात करने के बाद चली गई।
राज उस बरगद के पेड़ को देखता रहा फिर मेरे पास आकार मुझे गले लगा लिया और रोने लगा तो मैंने पूछा,
– तुम रो रहे हो..?
तो उसने कहा
– नहीं ये तो जीत की खुशी है पागल..

उस रात राज जौनपुर छोड़ कर चला गया.. कुछ दिन सारे मुहल्ले के लड़के मुँह लटकाये घूमते रहे और मैं कई रात तक उस ट्रेन की S2 बोगी को देखने जाता रहा जिससे राज मिर्ज़ापुर गया था..
कुछ दिनो में सब कुछ ठीक हो गया ,
अब प्रेमसभा में राज की जगह मैंने ले ली थी, धीरे धीरे दूसरे मुहल्लों के लड़के भी हमारे प्रेमसभा में आने लगे थे ,ये बात जब मैंने राज को facebook पे बताई तो वो बहुत खुश हुआ..

वही सुधा और राज distance relationship के दर्द को ज्यादा दिन झेल नहीं पाये जिसके कारण 4 महीनों के बाद ही उनका breakup हो गया .. और 1 साल के बाद सुधा भी राज की तरह शहर छोड़ कर चली गई ।

आज इस बात को 12 साल बीत चुके है,
माँ ने शादी के लिए किसी लड़की की तस्वीर भेजी है जिसे देखकर मैं बस हँसे जा रहा हूँ क्योंकि वो तस्वीर किसी और की नहीं राज की वसुंधरा यानी सुधा की है .।

:- कुशल दुबे

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अगस्त

मेरा तुम्हारे साथ आज भी इश्क़ में होना उतना ही साफ है,जितना की एक नवजात शिशु की अंगुली उसकी माँ के हाथ में होना…या फिर किसी बच्चे का प्रेम उस कागज़ की नाव के लिए जिसे वह बारिश के पानी में दौड़ाता रहता है.

वैसे,

वो रात याद है जिसमे चाँद के दूधिया रंग की रोशनी से लिपटा हुआ ताजमहल और भी चमक रहा था .. या फिर वो बनारस का घाट जहाँ हमने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर ढलता हुआ सूरज देखा था …

ऐसी ना जाने कितनी यादो को मैंने एक अलमारी में क़ैद कर के रख लिया है, देर रात जब सब सो जाते है तो चुपके से उठ कर उन्हें देख लेता हूँ .।

और हाँ,

तुम कहती थी ना तुम मेरे भीतर मुझसे ज़्यादा हो इसलिए अक्सर तुमको ढूंढने बैठ जाता हूँ. तुम्हे ना पाकर जब थक कर सोता हूँ तो तुम चुपके से मेरे बालो से खेलने आ जाती हो और मैं हड़बड़ाहट में उठ कर तुम्हे इधर-उधर देखने लगता हूँ फिर ना जाने कहाँ से कमबख़्त एक हिचकी आजाती है ।

अच्छा,

वो अगस्त का महीना याद है जब बारिश में भीगते हुए तुमने मुझे चूम के अलविदा कहा था,

वो अगस्त फिर से आने वाला है पर क्या तुम आओगी …?

“कुछ कुछ होता है”

(Something something happens)
INTRODUCTION

मैंने पहली बार उसको तालाब में से नहा के निकलते हुए देखा था , वो देखने में मोटा तगड़ा और मुझसे कही ज़्यादा काला था ,उसके गले में एक घंटी बधी थी जो जोर जोर से बज रही थी , उसकी छोटी सिंग जलेबी के जैसी घुमावदार थी ..
जब वो मेरे करीब से होकर निकला तो मैंने अपनी बहन (मौसी की बेटी) से पूछा की
ये कौन है ….??
पहले तो वो मुझे चिढ़ाने लगी फिर
उसने बताया कि ये रामखेलावन के यहाँ का है
“राहुल“ कहते है इसे ,
बेचारे की माँ को कल ही रामखेलावन ने बेच दिया ,
मुझसे उम्र में 4 महीने का बड़ा है , मेरे गाँव की सारी भैंसे इसके पीछे पागल है ।
मैंने राहुल का परिचय तो आपको दे दिया अब मैं अपना परिचय देती हूँ…
मेरा नाम “टीना” है मुझे प्यार से सब “टी” बुलाते है नाम सुन के आपको लगा होगा की काफी
बड़े घर की भैंस हूँगी , अगर ऐसा है तो आप बिल्कुल गलत समझ रहे है ये नाम मुझे मेरी मौसी ने दिया था ।
उनको ये नाम कहाँ से सुझा मुझे नहीं पता पर इस नाम से मुझे बहुत प्यार है ,
यहाँ तक मेरी बहन जिसके बारे में मैंने ऊपर बताया उसका नाम “चमेली” है…
मैं चमेली से 2 महीने की बड़ी हूँ यानी राहुल से 2 महीने की छोटी
मेरी उम्र 1 साल 5 महीना है वैसे अगर राहुल के पीछे मेरी मौसी की गाँव की सारी भैंसे पागल है
तो आपको बता दूँ मैंने भी अपने गाँव में कम झंडे नहीं गाड़े
न जाने कितनो की दिलो में मैं बसती हूँ यहाँ तक मेरे गाँव के प्रधान का भी भैंसा
लट्टू था मुझपे , पर मेरा भी अपना attitude है मैंने पहले से सोच रखा था
इश्क़ करूँगी तो किसी दूसरे गाँव के भैंसा से ।
मेरे मालिक को 5 दिन हो गये मुझे मेरी मौसी के गाँव में बेचे पर
किस्मत देखिये मैं आयी भी तो अपनी ही मौसी के घर।
हालाँकि मौसी की मौत पिछले ही महीने हो गई …
पर मुझे यहाँ अच्छा लगता है ,शुरू के एक दो दिन तो माँ की बड़ी याद आयी
पर अब सब ठीक है ।
आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा की आप अपना कीमती वक़्त जाया कर के
एक भैस की प्रेम कहानी पढ़ रहे है ,मुझे भी थोड़ा अटपटा लग रहा था जब मैं इसे लिख रही थी ,पर ये मेरे लिए कोई कहानी नहीं है ।
ये मेरा अतीत जिससे मैं ख़ुद से ज़्यादा प्यार करती हूँ ..
आप गाय को अपनी माता मानते है उसे पूजते है
क्योंकि वो आपको दूध देती है, मुझे इसमे कोई परेशानी नहीं है ।
और ना ही मैं चाहती हूँ की आप मुझे पूजे या माता बनाये
मैं तो बस आपको मिलाना चाहती हूँ मुझसे ,राहुल ,मंगला, और चमेली से
(नोट:-कहानी में इतना ना खो जाये की आपकी gf आपसे गुस्सा हो)
……………………….. आपकी – “टीना

(1-ये जो हल्का हल्का सुरूर है)

हाँ वो गर्मी की दोपहर थी जब मैं और चमेली बैठ के बात कर रहे थे
तभी अचानक से एक घंटी की अवाज़ सुनाई दी, मुझे लगा इस आवाज़
को मैंने पहले भी सुना है।
जरा पीछे मूड के देखो “चमेली ने पूछ हिलाते हुए कहा ”
पीछे मुड़ते ही मेरी धड़कने तेज़ हो गई, मैंने देखा राहुल
मेरी तरफ तेज़ी से भागा आ रहा था और वो घंटी उसके गले में ऐसे
जोर जोर से बज रही थी की मानो वो और राहुल दोनो आज़ाद हो गए है ।
राहुल के पीछे रामखेलावन का लड़का भी उसे पकड़ने के लिए दौड़ रहा
था …
राहुल अपनी माँ से दूर होके बहुत परेशान होगया है सुना है
3 ,4 दिन से भूसा तक नहीं खा रहा
“ चमेली ने उसके नीचे रखे हुए घास खाकर कहा ”
राहुल जितना करीब मेरे आ रहा था मेरी धड़कन उतनी ही तेज़ होती जा रही थी मेरा मन हुआ कि उस खेलावन के लड़के के पेट में अपनी जितनी भी सिंग थी घूसा दू पर मैं मज़बूर थी ,पूरी कोशिश के बाद भी मैं अपनी रस्सी को बधे हुए खुटे से नहीं छुड़ा पायी ।
मैंने मूड के देखा तो , राहुल मेरे करीब था ।
शायद राहुल ने पहली बार मुझे यही देखा ,वो मुझे देखते ही रुक गया ..
और बस देखे ही जा रहा था मैंने शर्म से अपनी नज़र नीचे कर ली ।
तभी रामखेलावन के लड़के ने राहुल को पकड़ लिया और वापस ले जाने लगा
….
राहुल बार बार पीछे मूड के मुझे देख रहा था ,मैंने भी अपनी पलके तब तक नहीं झपकी जब तक
राहुल अपने घर नहीं पहुँच गया …
राहुल का घर मेरे घर से थोड़ी ही दूरी पे था …
शाम तक मैं राहुल की यादो में खोई रही
जहाँ देखती वही राहुल खड़ा नज़र आता ..
शायद इस मुलाक़ात से आसमान भी उस दिन खुश था क्योंकि
शाम जैसे जैसे ढल रही थी बारिश वैसे वैसे तेज़ होती जा रही थी ….
उस शाम हम खेतो में चरने नहीं गए ..
शाम से रात कब होगई, बारिश कब बंद हुई मुझे तनिक भी पता नहीं था
मैंने चमेली से पूछा
“चमेली ओ चमेली सुन ,ये राहुल मुझे ऐसे क्यों देख रहा था..?”
“मंगला”भी मुझे ऐसे देखता है, इस बात को मैं आज तक नहीं समझ पायी और ना उसकी हिम्मत होती मुझे बताने की ,तो क्या घंटा तुझे बता पाउंगी,
पर एक बात तो ज़रूर है टीना जब ये मंगला मुझे एक अज़ीब नज़र से देखता है तो मेरे दिल में
“ कुछ कुछ होता है”
“चमेली ने अपने पूछ से मच्छर उड़ाते हुए नींद में कहा”
मंगला , राहुल का दोस्त है चमेली उसे बहुत पसंद करती है शायद मंगला भी करता है
पर कुछ बोलने से डरता है..
न जाने कब चमेली मुझसे बात करते करते सो गई ,और मैं बस तारो को देखते हुए राहुल
के ही बारे में सोच रही थी कि ,
क्या उसने कुछ खाया होगा..?
क्या मेरी तरह वो भी मेरे बारे में सोचकर परेशान होगा..?
तमाम सवालो के मैं जवाब ढूंढ ही रही थी कि
तभी मुझे राहुल के गले में बधी घंटी की आवाज़ सुनाई दी
मेरा दिल मानो एक पल के रुक गया हो …
तुम कौन हो ? “एक अजनबी आवाज़ ने पूछा”
मैंने पीछे देखा तो राहुल खड़ा था उसकी आँखे रात में बहुत चमक रही थी
मैंने हड़बड़ाहट में कहाँ
“तुम वही हो ना जो दोपहर में दौड़ते हुए यहाँ आये थे अपने घर से भाग के”
( मेरी भी कुछ सेल्फ रेस्पेक्ट है, attitude है ऐसे कैसे कह दू की मै तुमको जानती हूँ )
हाँ हम वही है पर तुम कौन हो..?
कहाँ से आयी हो..? “ राहुल ने फिर से मुझसे पूछा”
मेरा नाम टीना है हम लखनपुर से आये है चमेली हमारी बहन है ।
चमेली सो गई का..?
हाँ सो गई
उससे कहना मंगला उसको कल शाम में स्कूल के पीछे वाले खेत में चरने के लिए बुलाया है
कुछ बात करेगा डर रहा था कई दिन से हमसे देखा नहीं गया तो हम बताने आ गये ..
चलो हम जाते है “ राहुल ने जाते हुए कहा”
हम जानते है तुम हमे बुलाने आये हो “मैंने अपना पूछ तेज़ी से हवा नचा के कहा”
राहुल मुड़ा और मेरी तरफ देखा
और अपने दाँत दिखा के चला गया …
राहुल जब चलता है तो उसके घंटी की आवाज़ बहुत अच्छी लगती है
शायद राहुल के साथ साथ मुझे उसकी गले में बधी घंटी से भी प्यार हो रहा था…

मेरे मालिक का बेटा रेडियो फूल कर के गाना सुन रहा था, गाने के बोल थे
“ये जो हल्का हल्का सुरुर है ये ते तेरी नज़र का कुसूर है”
ऐसा लग रहा था गाना मेरे ऊपर ही गाया गया हो ….
मैं राहुल की बातो को सोचते सोचते न जाने कब सो गई
और जब मेरी आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी…

(2- तुम मिले तो जीना आ गया)

सुबह से शाम होने का जैसे नाम ही नहीं ले रही थी,इस बार सिर्फ मैं ही नहीं
चमेली भी उतनी ही परेशान थी ।
कैसे कैसे हमने वो सुबह और दोपहर काटी और अंत में वो बेला आ ही गयी
जब गाँव की सारी भैंस और भैंसा खेतो में चरने के लिये छोड़ दिये जाते है..
हम दोनो को बस इसी पल का इंतेज़ार था खुटे से छूटते ही हम इतनी तेज़ी से भागे
की लगा हमारे अंदर “धोनी” जैसे तेज़ दौड़ने की शक्ति आ गयी है ,चमेली तो इतनी खुश
थी की वह दौड़ते हुए गोबर भी कर रही थी ..
स्कूल के पीछे जब हम पहुँचे तो
हमने देखा मंगला और राहुल वहा पहले से ही पहुँच चुके है ..
राहुल ने हमे देख कर अपने गले में बधी घंटी को तेज़ से हिलाया
और इशारा किया कि यहाँ आ जाओ …
मेरे दिल और दिमाग में क्या चल रहा था मुझे कुछ पता नहीं था
जब हम उनके पास पहुँचे तो
..
देखो चमेली हमे तुमसे कोई बात नहीं करनी थी ये सब राहुल का किया धरा है ,
”मंगला ने खेत से घास चरते हुए कहा”
पर मुझे तो तुमसे करनी है ना मेरे रजनीकांत “चमेली ने प्यार से मंगला के पास जा कर कहा”

चमेली मैं तुझे आज मौका दे रहा हूँ जो करना है कर ले , पर मुझे और टीना को 2 मिनट के लिए अकेले छोड़ दे ,वैसे तुम दोनो उस तालाब के पास क्यों नहीं जाते जा कर एक बार नहा के देखो बहुत गहरा है
“राहुल ने मेरी तरफ देखते हुए चमेली से कहा”
इतना सुन चमेली ने मंगला को अपनी पूछ उठाकर दौड़ा लीया,और दोनो तालाब के पास जाकर बात करने लगे शायद मंगला सबके सामने बात करने में शर्माता था …

उन दोनो के जाते ही मेरी धड़कन और तेज़ हो गई ,मुझे डर था कहीं मैं कह ना बैठू
“राहुल तुम्हे देख कर मुझे कुछ कुछ होता है”

ये वाली घास खाओ ना अच्छी है …(राहुल ने कहा)
हाँ ,खाती हूँ
तुम कल रात में डर तो नहीं गई थी मुझे देख कर
मैं तो तुम्हे अभी देख के डर रही हूँ कितने अज़ीब लगते हो तुम (attitude बताया था ना)
अच्छा तुम तो बड़ी जैसी गायो की तरह रंगबिरंगी और गोरी हो
जो भी है तुमसे तो अच्छी हूँ .(ये कह कर मैं घास चरने लगी)

कुछ देर तक हम दोनो शांत रहे ,फिर मैंने सोचा अब पसंद करती हूँ तो
इतना क्यों परेशान करु ।
अच्छा सुनो ,तुम रात को अपनी रस्सी को छुड़ा के मेरे पास कैसे आये थे ,
” मैंने पूछ हिला कर कहा”
वो, मेरी रस्सी थोड़ी कमज़ोर है मैं हर रात छुड़ा लेता हूँ और सुबह अपनी जगह पे बैठ जाता हूँ..
तुम्हे अपनी माँ की याद आती होगी ना ..?
हाँ आती तो है ,पर अब हमेशा माँ के साथ तो रह नहीं सकते ना हम सब इंसानो की तरह,
वैसे तुमको भी तो आती होगी तुम भी तो अपना घर छोड़ के चमेली के यहाँ आयी हो ..

हाँ याद तो मुझे भी आती है माँ की “ मैंने कहा”
जरा मंगला और चमेली को दखो “ राहुल ने मुँह पघुराते हुए कहा”
मैं जोर जोर से हँसने लगी क्योंकि चमेली मंगला को तालाब के चारो तरफ दौड़ा रही थी…

हम देर तक बात करते रहे ,हमारी बाते खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी
राहुल ने कहा,
” शायद आज रात से मैं बाहर नहीं निकल सकूँगा, रामखेलावन आज नई रस्सी लेकर आने वाला है
मैं दो मिनट के लिए चुप हो गई …
तभी मंगला और चमेली आ गये ,और काफी शाम भी हो गई थी
हम वापस लौटने लगे, मंगला बिना शर्म के चमेली से चाँदनी-चिंटू(लैला-मजनू)
जैसी बाते कर रहा था…
राहुल मुझे देखकर बस मुस्कुराते जा रहा था, न जाने हम घर कब पहुँच गये हमे पता भी नहीं चला
….
घर आकर मैं और चमेली बहुत खुश थे पूरी रात मैं और वो
राहुल ,मंगला की बाते करते रहे ..
बात करते करते चमेली सो गई , रामखेलावन के बेटे ने अपना रेडियो फूल कर दिया
इस बार गाना इमरान हाशमी के फिल्म का बज रहा था ,गाने के बोल थे
“तुम मिले तो जीना आ गया” गाने ने न जाने मुझे कब अपनी आगोश में ले लिया
मुझे पता भी ना चला…
फिर हर रोज़ हमे शाम होने का इंतेज़ार रहता ,मुझे लगता ये रात के बाद सुबह दोपहर
क्यों हो जाती है सीधे शाम क्यों नहीं होती
हम रोज़ उसी स्कूल के पीछे वाले खेत में मिलते
खूब सारी बाते करते और रात होने से पहले घर आ जाते , फिर मेरी और चमेली की बात शुरू होती और वो हमेशा की तरह मुझसे पहले सो जाती
बाद में मैं भी रेडियो के गानो की आगोश में आकार सो जाती ..
जब कभी नींद नहीं आती तो मैंने सोने का एक और तरीका निकाल रखा था
देर रात जब सन्नाटा होजाता तो मुझे राहुल के गले में बधी घंटी की आवाज़ साफ सुनाई देती
उसको सुनते ही मुझे लगता राहुल मेरे करीब है, राहुल के साथ मुझे अब उस घंटी
से भी प्यार हो चुका था ।।
पर ये बात अभी राहुल को पता नहीं थी…..
(3- काटे नहीं कटते ये दिन ये रात)

एक ऐसी ही शाम थी हम स्कूल के पीछे वाले खेत में प्रेमी कबूतर की तरह दो जोड़ो में इधर उधर भटक रहे थे
चमेली और मंगला के बीच वो सब कुछ हो चुका था जो एक भैंस और भैंसा अपना प्यार दिखाने के लिए करते है ,
पर हमारे प्रेम की कहानी की किताब तो अभी शुरू ही नहीं हुई थी बस भूमिका लिखी जा रही थी या आप ये भी कह सकते कि चमेली मुझसे तेज़ थी..
पर मैं चाहती थी की इस चीज़ की शुरुवात राहुल की तरफ से हो ,
तभी राहुल ने मुझसे कहाँ सुनो ,
कुछ कहना था
तो कहो ,पूछ क्या रहे हो
थोड़ी वैसी बात है
कैसी..?
(राहुल कुछ देर चुप रहा और फिर कहता है)
“देखो हम पिछले 3 महीनो से यहाँ मिल रहे है ,तुम्हे हर रोज़ देखता हूँ फिर भी मेरे भीतर तुम्हे हमेशा देखने की बेकरारी होती है, सच कहू तो कुछ तो बात है तुम में जो हर वक्त तुम मेरे दिल और दिमाग में चलती रहती हो…
मेरी बात सुनो टीना मैं कुछ कह रहा हूँ ये घास कही भाग नहीं रहा मेरी तरफ देखो
..
!अरे सुन रही हूँ बाबा “मैंने घास खाते हुए ऊपर मुँह कर के कहाँ”
I love you
क्या मैंने सुना नहीं
अरे I love you ,do you love me ? “राहुल ने पूछा”
मुझे दो मिनट तक अपने होने का अहसास ही नहीं रहा ,ना जाने कितने दिनों से मैं ये सुनने को परेशान थी ,मैं राहुल को कुछ जवाब देती तभी

क्या माल है भाई,”कुछ आवाज़े साथ में पीछे से आयी”
जब मैंने और राहुल ने देखा तो “ राज अपने दोस्तो के साथ हमारे पीछे खड़ा था”
राज गाँव का सबसे हरामी भैंसा था और उसके तीन दोस्त किसी दूसरे गाँव से थे । वो इतने बड़े हो चुके थे कि उनके मालिको ने उन्हें छोड़ दिया था
राज और उनके दोस्तो का बस एक ही काम था वो गाँव की भैंसो को छेड़ते और खेतो की फसल को खराब करते ,तमाम कोशिशो के बाद भी गाँव वाले उनको पकड़ नहीं पाये थे, क्योंकि वो गाँव के पास वाले जंगल में चले जाते थे ….
राज और उनके दोस्तो को देख कर चमेली और मंगला हमारे पास आ गये

औकात में रह के बोल राज ,” राहुल ने गुस्से में कहा”
इ कौन है बे, “ राज ने राहुल के तरफ गुस्से में बढ़ते हुए कहा”
ये जो भी हो तू अपनी हद में रह राज “ मंगला उन दोनो के बीच में आके बोलता है”
अबे चूतियो जरा इन मुन्नो को समझाओ, हम इ मौतरमा से मिल ले,” राज मुझे देखते हुए अपने दोस्तो से कहता है ..

इतना कहते ही राज के दोस्त मंगला और राहुल पे टूट पड़े ।
मैंने देखा राहुल को ना जाने क्या हो गया था ,मानो उसके भीतर भगवान “यम” आ गये हो ,वह भी एक शेर की तरह राज के दोस्तो पे टूट पड़ा…
और उनमे एक भयंकर लड़ाई होने लगी..
राज मेरी तरफ बढ़ ही रहा था तभी चमेली उसके सामने आकार खड़ी हो गई और बोली “ तुझे भैंसो को छेड़ने में बहुत मज़ा आता है ना, आज तुझे और भी मज़ा मिलेगा आजा टीना आज हम इसको छेड़ते है”

तभी गाँव वालो की आने की आवाज़ हमने सुनी ,राज और उसके दोस्त हमे छोड़ के भागने लगे ,मैंने देखा राहुल ने उसके एक दोस्त की आँख फोड़ दी थी उनके जाते ही राहुल दौड़ के मेरे पास आया और बोला
तुम ठीक हो ना टीना..?
मैं बस रोये जा रही थी( मैं बहुत घबरा गयी थी)
टीना क्या हुआ..तुम रो क्यों रही हो..?
मैं राहुल के करीब गयी और बोली I love you to वो भी आज से नहीं
बल्कि उस दिन से जब मैंने तुमको पहली बार तालाब से नहा के निकलते हुए देखा था… ।
ये सुनते ही मंगला और चमेली ने भैसों वाली एक तेज़ आवाज़ निकाली
राहुल हँसते हुए मेरे करीब आकार अपने मुँह से मुझे प्यार करने लगा…

रोज़ की तरह रात होने से पहले हम घर आ गये…
उस दिन मैं बहुत खुश थी और शाम वाले हादसे के बाद थोड़ा परेशान भी ..
पर मेरे लिए आज का दिन बहुत बड़ा था क्योंकि हम दोनो ने एक दूसरे को अपना लिया था …
रात होते ही चमेली और मेरी बात शुरू हो गई ..
आज तो बड़ी खुश होगी ना मिस टीना , और हो भी क्यों ना राहुल जो मिल गया जिसके पीछे पूरी गाँव की भैंसे पागल है…
मैंने हँसते हुए चमेली को अपने पूछ से मारा ,
और कुछ देर सोचने के बाद बोली …
चमेली ,” हम भैंस को हमारे मालिक इतना प्यार करते पर भैंसा के साथ ऐसा क्यों नहीं या तो उन्हें छोड़ देते या फिर बेच देते ,सच कहूँ तो मुझे राहुल को लेकर बहुत डर लगता है कही मैं उससे दूर ना हो जाऊ…
,” मैंने अपना मुँह ज़मीन पे रख के कहाँ”
..

देखो टीना अब हमारे साथ जो होना होगा वो होगा पर कल को सोच के आज परेशान क्यों हो..?
वैसे भी ये इंसान हमसे भी मतलब से प्यार करते अगर हमारे पास इनको देने को दूध नहीं होता तो हमको भी छोड़ देते या कटने को दे देते..
ऊपर से सरकार भी तो
बस गाय और बैल बचा रही है ,भले दूध हम उनको गाय से ज़्यादा देते हो खैर अगर ऐसे सोचने बैठ जाओगी तो पूरी रात छोटी पड़ जायेगी इसलिए सो जाओ, …

शायद चमेली सही कह रही थी ,मैंने भी कल का कल पे टाल कर
राहुल के बारे में सोचने लगी कि राहुल ने मुझे आज कैसे अपने मुँह से प्यार किया और इतना घुमा फिरा के I love you बोला ..
तभी मेरे मालिक के बेटे ने अपने रेडियो को फूल कर कर दिया
इस बार गाना अनिल कपूर की फिल्म का चल रहा था गाने के बोल थे
“काटे नहीं कटती ये दिन ये रात …..लो आज मैं कहती हूँ I loveyou”
गाने ने ना जाने हर रोज़ की तरह मुझे अपनी आगोश में ले लिया

जब मैं उठी तो मेरे चेहरे पे एक खुशी थी मानो मुझे पूरी दुनिया की सारी खुशिया मिल गई हो तभी अचानक मेरी नज़र
चमेली पर गई ,चमेली रो रही थी…

क्या हुआ चमेली ..?
चमेली ने कोई जवाब नहीं दिया बस मेरी तरफ देख के और तेज़ी से रोने लगी
मैंने घबराते हुए आवाज़ में फिर पूछा क्या हुआ चमेली..?
राहुल को रामखेलावन ने कल रात में बेच दिया….

(4:- हमारी अधूरी कहानी )

ये सुनते ही मेरे दिल पे एक पहाड़ सा टूट पड़ा , दो मिनट तक मुझे अपने आप के होने का अहसास ही नहीं रहा
मुझे लगा अभी कल तक तो हम कितने खुश थे अचानक ये हमे
किसकी नज़र लग गई ।
मानो मेरी ज़िन्दगी एक पल में तबाह हो गई ..
चमेली ने बार बार अपने सिंग से मार के अहसास दिलाया की मैं ज़िंदा हूँ…
तो मैं कराह पड़ी
जोर जोर से आवाज़े निकालने लगी मैंने पूरी कोशिश की अपनी रस्सी को खुटे से अलग कर लू ताकि मैं राहुल के पास जा सकू ,मुझे लगता था की राहुल कही भी हो उसकी बधी घंटी की आवाज़ से मैं उसे ढूंढ लूंगी । पर मैं खुटे से आज़ाद ही नहीं हो पायी
सब कुछ मानो खत्म सा हो गया…..
सुबह से लेके दोपहर तक मैं बस रोती रही कि
काश काश हम राहुल कही भाग जाते या फिर जंगल में ही चले गये
होते ,भले जंगली जानवरो से साथ में मारे जाते पर ये दूरी मुझसे सही नहीं जा रही थी…
चमेली मुझे दोपहर तक चुप कराती रही , हालाँकि मैं रो नहीं रही थी फिर भी मेरी आँखों से बारिश होती रही…
दोपहर को मैंने देखा की रामखेलावन मेरे मालिक से बात कर रहा है
उसे देखते ही मुझे ना जाने क्या हुआ मैंने अपनी रस्सी को एक झटके
तोड़ दिया और रामखेलावन पर टूट पड़ी …
रामखेलावन मुझे अपनी ओर आता देख डर से घर के भीतर भाग गया

मेरे मालिक ने मुझे डंडे से बहुत पीटा और वापस से खुटे में बाध दिया ,दोपहर से शाम हो गई मैं रोती रही बस ये सोच के
कि वो राहुल के साथ क्या कर रहे होंगे कही वो उसको को काटने के लिए तो नहीं ले गये है ,तमाम सवाल मेरे भीतर चल रहे थे
और मैं उन सवालो से लड़े जा रही थी
ना जाने कब सुबह से शाम हो गई सारे जानवर चरने के लिए छोड़ दिये गये पर मैं और चमेली उस शाम चरने के लिए नहीं गये…
चमेली माँ की तरह मुझे समझाती रही , शाम से रात हो गई
रात में ना तो मुझे उस रेडियो के गाने का ख्याल रहा और ना ही खुद का…
रात से सुबह हुई
चमेली ने मुझसे कहाँ..
“कुछ खा लो टीना कल से तुमने कुछ नहीं खाया”
मैंने मना किया तो उसने अपनी कसम देकर सुबह मिले मालिक के घर से बासी खाने को खिला दिया…
ना जाने 4 दिन कब बीत गये मुझे कुछ पता नहीं था …
फिर अचानक एक दिन मंगला घास चर के वापस अपने घर जा रहा था तो हमारे पास आया और बोला कि कल शाम में स्कूल के पीछे मिलो
राहुल का पता चल गया है…
इतना बोल के वो चला गया, ये सुन के मुझे थोड़ी सी खुशी मिली
मेरी आंखों के सामने मुझे हर वक़्त राहुल ही दिखता ,मैं उसे देखने के लिये पागल हुई जा रही थी… ना जाने मैंने एक और रात कैसे काटी
अगले दिन की शाम जैसे हुई
मैं और चमेली स्कूल के पीछे वाले खेत में पहुँच गये , मंगला वहा पर पहले से मौज़ूद था..
हमारे पहुँचते ही मंगला ने कहाँ ,
“कल शाम जब मैं खेतो में चरने आया था तो मुझे अपनी गाँव की कुछ
भैसों ने बताया कि राहुल को पप्पू कसाई खरीद के ले गया है “
इतना सुनते ही जैसे मैं बेहोश होने लगी अचानक से मैं खेत में गिर गई
चमेली ने मुझे संभाला
फिर मंगला ने कहा
“तुम परेशान मत हो टीना देखो मैं पप्पू कसाई का घर जानता हूँ ,अपने गाँव के बाहर है अगर तुम कहो तो हम चलते है रात होने से पहले वापस आ जायँगे ।
हम राहुल को लेकर आयंगे “मैंने कहा”
हाँ हम पूरी कोशिश करेगे…

और फिर हम वहा से निकल के पप्पू कसाई के घर की तरफ चल दिये
पप्पू गाँव का सबसे बड़ा कसाई है उसके यहाँ से माँस, बकरा, भैंसा शहरो में बेचा जाता था ,वो काफी पैसे वाला कसाई था
जब हम उसके घर पहुँचे तो देखा
राहुल के अलावा कई भैंसा बधे हुए थे ,और कुछ दूरी पर बकरे ..
राहुल कोने में पड़ा लेटा था, वो बीमार लग रहा था ।
चुपके से घर के पीछे से होते हुए हम राहुल के पास पहुँचे …
हमको देखते ही राहुल खुशी से खड़ा हुआ और हमारे पास आया
उसकी रस्सी एक बड़े खुटे में बधी हुई थी …
हमारे करीब आकार राहुल की आँखो में आँसू आ गये ,उसकी आँखों में आँसू देख हम सब रोने लगे…
कैसी हो टीना..?
जैसे तुम हो राहुल…
ना जाने हमे किसकी नज़र लग गई ..
तुम परेशान ना हो राहुल हम तुमको यहाँ से ले चलेगे ,”चमेली ने कहा”
बहुत मुश्किल है यहाँ से निकलना वो देखो पप्पू ने 4 जंगली कुत्ते पाल रखे है मैं चाह कर भी यहाँ से नहीं निकल सकता और ना तुम मुझे छुड़ा सकते.. चमेली तुम टीना का ख़्याल रखना…”राहुल ने अपने मुँह से झाग हटाते हुए कहा”

राहुल तुझे क्या लगता हम तुझे ऐसे छोड़ देगे,देखना कैसे भी कर के तुझे यहाँ से लेकर चलेगे…’मंगला ने आँसुओ को पोछते हुए कहा”
नहीं ले चल सकते तुम लोग क्यों नहीं समझ में आरहा तुम सबको आज से 4 दिन बाद मैं शहर चला जाऊँगा कटने के लिए मेरी बात मानो तुम लोग जाओ यहाँ से…
हमने कुछ देर राहुल से बात कि उसके बाद राहुल ने मुझे अपने मुँह से और जीभ से चाट कर प्यार किया और वहा से हम रात होने से पहले वापस घर आगये ..
राहुल को देख के मुझे थोड़ी से खुशी मिली कि वो ठीक ठाक है
मेरे मालिक के बेटे ने रेडियो को फुल कर दिया इस बार गाने के बोल थे
“ हमारी अधूरी कहानी” मैं 3,4 दिनों से सोयी नहीं थी उस रेडियो ने ना जाने मुझे लोरी सुना कर कब सुला दिया …
अगले 2 दिन हम शाम को राहुल से मिलने पप्पू कसाई के यहाँ जाते रहे और रात होने से पहले घर आ जाते …
राहुल के एक दिन जाने से पहले हम जब राहुल से मिलने गये तो राहुल ने कहाँ ,
पप्पू अपने परिवार के साथ आज रात अपने शहर वाले घर जा रहा है ये कुत्ते भी उसके साथ जायँगे रात में बस एक आदमी यहाँ रहेगा आज मैं यहाँ से निकलने की कोशिश करूँगा, मंगला सुन एक काम कर..।
हाँ बोलो..।
ये मेरे रस्सी को अपने दाँत से काट ,जब थोड़ा बचे तो छोड़ देना और हाँ ये मेरी घंटी तोड़ दे वरना इसकी आवाज़ से मैं पकड़ा जा सकता हूँ ।।

ये सुन के मैं चाह कर कुछ बोल नहीं पायी कि राहुल मुझे तुम्हारे घंटी से भी बहुत प्यार करती हूँ इसे अपने आप से अलग मत करो
पर मैं भी मज़बूर थी…
देखो अगर मैं यहाँ से निकल पाया तो सीधे जंगल में चला जाऊँगा
और कल शाम हम उस स्कूल के पीछे वाले खेत में मिलेंगे फिर वहा से भाग के जंगल में चले जायँगे ,” राहुल ने मेरे और चमेली कि तरफ देख के बोला”…
राहुल से मिलने के बाद हम वापस घर आ गये…
और कल सुबह होने का इंतेज़ार करते रहे…..

(5- ज़िन्दगी का सफर है ये कैसा सफर )

रात को सोते वक़्त मैं ईश्वर यमराज से माँगती रही कि कल हम एक
हो जाये,
और मुझे ईश्वर पर भरोसा भी था की कल मेरी ज़िन्दगी से इस दुःख के बादल को वो हटा देगा, हम एक हों जायेगे ,हमारे मिलने की एक खूबसूरत शाम होगी ,मिलने की ख़ुशबू हर तरफ फैल जायेगी ,ईश्वर खुद हमे मिलाने धरती पर उतरेगा …
यह सब सोचते-सोचते मैं सो गई…
सुबह उठी तो मैं परेशान हो गई कि
क्या राहुल वहा से निकल पाया होगा ?
वो इस वक़्त कहाँ होगा..?
तमाम सवालो से मैं और चमेली लड़ते हुए शाम का इंतेज़ार कर रहे थे तभी मैंने देखा…
रामखेलावन अपनी साइकिल से एक पॉलीथिन लेकर उतरता है और मेरे मालिक से कहता है
“ मियां इ लो खाने में आज हमारे भैसा का मांस खाओ, आज सुबह ही कट के शहर गया है पप्पू कसाई खास तोहरे लिए भेजीन ह…. बोलिन कि जा के ज़ामिन मियाँ के खिला दियो”….

ये सुनते ही जैसे मैं पागल हो गई ,जोर जोर से चिल्लाने लगी और उतनी ही पागलो की तरह चमेली भी चिल्ला रही थी.. हम बस रोते ही जा रहे थे क्योंकि अब हमे राहुल कभी नहीं मिलने वाला था…

दोपहर को मेरे मालिक के घर राहुल का मांस बना सबने पेट भर के खाया
जो कुछ बच गया वो मेरे सामने फेक दिया जिसे गाँव के कुत्ते मेरी आँखों के सामने नोच नोच के खा रहे थे..
क्या आप ने भी अपने प्रेमी के मांस को किसी को खाते अपनी आँखों से देखा है..?
मैं सुबह से शाम तक बस चिल्लाती रही और अंत में चुप होकर बैठ गई…
ना जाने कब शाम हुई और ना जाने कब रात मुझे पता हीं नहीं था..
रात के 10 जैसे बजे मेरे मालिक के बेटे ने अपना रेडियो फूल कर दिया
इस बार गाने के बोल थे,
“ज़िन्दगी का सफर है ये कैसा स सफर कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं”
मैं रोते रोते कब सो गई मुझे पता नहीं रहा..

आज इस बात को डेढ़ साल हो गये पर मैं ज़िंदा हूँ अपने मालिक को दूध दे रही हूँ , ना तो अब मुझे रातो को राहुल की घंटी सुनाई देती है और ना ही राहुल कहीं नज़र आता है…
मंगला के साथ भी ठीक वही हुआ जो राहुल के साथ हुआ था
इस बार मैंने चमेली को संभाला…
अब बस यही सोचती हूँ कि
ये चाँद सूरज यहाँ है तो
राहुल तुम क्यों नहीं हो..?
स्वर्ग इस धरती पर है तो
राहुल तुम क्यों नहीं हो..?
मैं आज भी तुम्हारे एक अज़ीब तरीके से देखने वाले नज़र के इंतेज़ार में बैठी हूँ जिसे देख कर मुझे “कुछ कुछ होता था”…।

कुशल दुबे

“ शब्द और तुम” ( मानव कौल की कहानी शब्द और उनके चित्र से प्रभावित)

मैं उसका नाम लिखना चाहता था पर मैंने लिखा “आसमान”
फिर मैंने उसे ढूँढ़ना शुरू किया, वो मुझे नीले रंग के कपड़ो में दूर से आती दिख रही थी पास आते आते उसके नीले कपड़े पर
सूरजमुखी के फूल उग आये थे ,कुछ मुरझाये से कुछ खिले हुए
,
वह किसी चीज़ से डर के भाग रहीं थी पता नहीं ऐसा लग रहा था मानो वो उड़ना चाहती थी
पर जमीन में कही फँसी हुई है
उसको ऐसे परेशान देख कर मुझसे रहा नहीं गया मैंने तुरंत नया
शब्द लिखा “तितली” वो उड़ के मेरे पास आगयी
पास आकार वो मुझे देखकर बस हँसे जा रही थी,
वो हँसते हुए बहुत खूबसूरत दिख रही थी मैंने जैसे ही उसेके हाथो को छूने की कोशिश की तो ,मैंने देखा उसका मालिक दौड़ा चला आरहा था मानो वो इसे मारना चाहता हो ,वो हँसते हँसते अचानक रोने लगी और मेरे पीछे आकर छुप गई मैंने तुरंत नया शब्द लिखा
“मौत”
हम अचानक से बनारस के किसी घाट पर पहुँच गये अब उसने काले रंग का कपड़ा पहना था पर
हाथ में वही सूरजमुखी के फूलो को लिये हुए थी कुछ मुरझाये हुए कुछ खिले हुए और हँसते हुए मुझसे कहती है क्या देख रहे हो ..?
मैंने कोई जवाब नहीं दिया
उसने फिर से पूछा अरे क्या हुआ पागल कहाँ हो ..?
मैंने कहाँ कहीं नहीं चाय पियोगी ? उसने तुरंत कहाँ हाँ पर पार्ले जी बिस्किट
के साथ ,मैं चाय लेकर आया और हम
गंगा जी के करीब चलेगये वो अचानक से और भी ज़्यादा खुश होगई और नदी
के पानी से खेलने लगी, अपने पैरो को पानी में डाल के एक पत्थर पर बैठ
गई और मुझे भी अपने पास बुला लिया और बोली
तुम तो यहाँ हर दूसरे तीसरे दिन आते हो ना, क्या अब जब आओगे तो मेरे लिए
ऐसे पैर पानी में डाल कर बैठोगे
मैंने बिना कुछ सोचे हाँ कह दिया …
हम बहुत देर तक एक दूसरे के करीब बैठे रहे और हमारे दोनो के बीच में जो थोड़ी सी जगह छूटी थी उसमे शायद
महादेव बैठे थे ,वो बहुत खुश थी उसे देखकर उतना ही खुश मैं…
मैंने तुरंत नया शब्द लिखा “खुशी”
और हम एक मेले में पहुँच गये जहाँ बहुत सारे झूले थे
उसने लाल रंग का कपड़ा पहना था उस कपड़े पे भी सूरजमुखी के कुछ मुरझाये हुए और कुछ खिले हुए फूल बने थे ..
उसेने मुझसे कहाँ उसे झूले बहुत पसंद है और मेरा हाथ पकड़ के एक बड़े
झूले के पास ले गई और बोली हम इसपे चलेगे
वो झूला बहुत ऊँचा और बड़ा था और मुझे ऊँचाई से बहुत डर लगता है पर
मैं कुछ कहता उससे पहले वो मुझे लेकर झूले में बैठ गई
मैं डर रहा था इसलिए उसके हाथ को कस के पकड़ के रखा था ..
झूला झूलते वक्त उसके बाल उड़ते हुए मेरे चेहरे पर आरहे थे
ऐसा लग रहा था मानो मेरे भीतर से सारे डर धीरे धीरे खत्म हो रहे थे

तभी मैंने नया शब्द लिखा
“डर”
इस बार मैं अपने गाँव पहुँच गया मेरे सामने खेत में सूरजमुखी के फूल थे कुछ मुरझाये हुए कुछ खिले हुए , वो मेरे साथ फोन पे थी
रोते हुए बस यही बोल रही थी मुझे अपने साथ बांध लो और कही ले
चलो मैं यहाँ नहीं रह सकती ,मुझे सबसे ज़्यादा डर अगर ऊँचाई के बाद किसी
चीज़ से लगता है तो उसके रोने से ,वो बस रोये जा रही थी और मैं उसको
अपने करीब होने का अहसास दिला रहा था कि सब ठीक होगा तुम्हे कोई
कैद नहीं कर सकता

तभी मैंने नया शब्द लिखा
“आज़ाद”
और
हम अचानक से एक पहाड़ पर पहुँच गये उसके हाथ में फिर से
वही सूरजमुखी के मुरझाये हुए और कुछ खिले हुए फूल थे । लेकिन इस बार
उसके साथ एक सफेद कुत्ता भी था ,वो मुझे ना जाने क्यों घूरे जा रहा था
इस बार उसने मुझसे कहाँ तुमको पता है
ये जानवर हम इंसानो से ज़्यादा वफादार होते है तुम बुरा मत मानना
पर इस दुनिया के सारे मर्दो को औरत से एक ही चीज़ चाहिए होता है और वो
मिलते ही आप से दूरी बनाने लगने लगते है, औरत बेचारी इसे प्यार समझ कर दे देती है ।
पर इन जानवरो से तुम जितना प्यार करोगे ये भी तुमसे उतना ही प्यार करेगे
अच्छा सुनो यहाँ कितना सुकून है ना… जैसे लग रहा मैं आज कितनी आज़ाद हूँ
काश मैं हमेशा यही की हो जाऊ मैं वापस घर नहीं जाना चाहती

मैंने तभी नया शब्द लिखा
“घर”
हम अचानक से ऐसी जगह पहुँच गये जहाँ दूर दूर तक कोई नहीं था
बस एक झोपड़ी जिसमे हम सो रहे होते है हमारे होठ के दूसरे के इतने करीब थे की मानो आपस में एक दूसरे को चूम रहे हो
उसने मुझे कस के गले से लगाया और बोली उठो मेरे वफादार कुत्ते सुबह हो गई मेरी जान
वो उठ के जाने लगी मैंने उसे खीच के एक वापस से कस के गले से लगा लिया और
उसकी आँखों में देखने लगा
कुछ देर बाद वो मुझे धक्का देकर उठती है और कपड़े पहनने के बाद बाहर चली जाती है
मैं अभी सोया रहता हूँ
वो वापस से कुछ देर बाद भीतर आती है उसके हाथ में
कुछ सूरजमुखी के फूल होते है पर इस बार कोई भी मुरझाया हुआ फूल नहीं सब के सब खिले हुए…
मुझे ये सब बिल्कुल एक सच जैसा लग रहा था
तभी मैंने
नया शब्द लिखा
“सच”

मैं फिर से वही पहुँच गया जहाँ से मैंने शुरुवात की थी …..

“मेरा पहला इंटरव्यू”

-: “वेटिंग रूम का दरवाज़ा खुला

चपरासी (2 3 फ़ाइल के साथ बाहर आता है और बोलता है )

:- “”सूर्यांश सिंह ,दीपाली पाण्डेय और विशाल कुमार अपनी अपनी फ़ाइल तैयार रखे journlst पद का साक्षात्कार (interview) होने वाला है ,इतना बोल के वो अंदर चला जाता है”

:- दीपाली सूर्यांश और विशाल तीनो के चेहरे डरे और सहमे हुए होगये ..

(सब अपनी फाइले और शर्ट टाई सही करने लगे )

(दीपाली एक बोतल के साथ अलग सीट पे होती और बार बार पानी पी रही है , उसकी माँ का फोन भी उसे बार बार आरहा है)

फ़ोन की घंटी फिर बजी
दीपाली हा माँ मैं इंटरव्यू ख़त्म होते ही आपको फ़ोन कर के बताती हूँ सब और मैं फ़ोन अब बंद कर रही बाय ये कह के उसने फ़ोन काट दिया

(चपरासी फिर से आता है और बोलता है)

चपरासी :-सूर्यांश सिंह आईये ।

(सूर्यांश सहमा हुआ उठता है उसकी फ़ाइल गिरती है उसे फिर उठाता है और अपना टाई सही करता हुआ अंदर जाता है )

“जैसे वो अंदर घुसता है तो देखता है 3 आदमी उसके सामने एक टेबल के पीछे सोफे पे बैठे है जिनमे से एक नामी पत्रकार झा, एक jnu के टीचर पाठक और j न्यूज़ के संस्थापक तिवारी जी बैठे हुए हैे”

सीट पे बैठने के बाद

झा -“हा तो सूर्यांश जी कहा से है आप कुछ बताइये अपने बारे में”

सूर्यांश– सर मैं जौनपुर से हूँ और मैंने पढाई अपना स्कूल ग्रेजुएशन वही से किया बाद में दिल्ली में आया और भारतीविद्या भवन से journalism किया ,मैंने सब मार्कशीट दिए है फ़ाइल में सर

पाठक -दिए हो तो क्या हुआ मुँह से बोलने पे छाले नहीं पड़ जायेगे और पत्रकार बनने आये हो बोला नहीं जाता तुमसे ।

तिवारी -सिंह मतलब “ठाकुर” ना

सूर्यांश – जी सर

तिवारी -यार ठाकुर ने तो गब्बर को बिना हाथ से मार दिए एक तुम ठाकुर हो की बोल नहीं पा रहे

(और फिर तीनो हँसने लगे, सूर्यांश ने भी कालिया की तरह उनका साथ दिया और हँसने लगा)

झा– ऑपेरशन ब्लू स्टार कब हुआ था ठाकुर साहब ?

सूर्यांश :- सर ये 1985 से 1988 के बीच में सिख और सैनिको के बिच में हुआ था ।

पाठक -हहहह ठाकुर जी आपने तो इतिहास ही पलट दिया

झा– अच्छा छोड़ो जरनैल सिंह भिंडरांवाले थे नाम में सिंह है कही रिश्तेदार तो नहीं थे ?

सूर्यांश– सर ये नहीं पता

तिवारी :- चलो यही बता दो की इंदिरा जी ने इमरजेंसी कब लगायी ?

सूर्यांश -सर पाक से लड़ाई के बाद लगाई थी

पाठक:- सन् सन् ?

सूर्यांश:- सर वो तो नहीं पता

झा – अच्छा एक शोले के ठाकुर का एक डायलाग ही मार दो

सूर्यांश– अरे सर ….

तिवारी -बोलो यार

सूर्यांश-(ये हाथ मुझे देदे thakur)

तिवारी -ठाकुर जी बहोत बहोत शुक्रिया फ़िलहाल बहार चलिए और रिजल्ट आने का इंतज़ार करीये

इतना सुन के सूर्यांश घबराया और सहमा हुआ वहा से उठा दरवाज़े की तरफ चल दिया

“चपरासी सूर्यांश को लेकर साथ बहार आया और एक आवाज़ आवाज़ लगाई

चपरासी -: “विशाल कुमार “चलिए

विशाल सहमा हुआ चपरासी के साथ अंदर जाता है और तीनो महारथियों के सामने बैठ जाता है ।

झा – हाँ तो “विशाल जी “आपका सरनेम कुमार ही है?

विशाल-नहीं सर, वो वैसे तो शुक्ला है….लेकिन..

झा -: “”लेकिन क्या…फिर लिखते क्यों नहीं…मेरा भी झा है, मैं तो लिखता हूं””

विशाल-नहीं सर, वो दरअसल…मैं जाति को नहीं मानता सो जाति का नाम भी हटा दिया…

तिवारी– : ओह…सीम्स इट चेंजेस समथिंग…कास्ट इज़ अ ट्रुथ, मे बी इट इज़ बिटर फॉर यू, बट इफ़ इट इज़ देअर, इट इज़ देयर…वैसे भी यू वोंट गेट रिज़र्वेशन ईवेन इफ़ यू रिमूव योर सरनेम…

पाठक :-,”रविश कुमार बनना है क्या?”“

विशाल :- हां जी, पसंद है वो मुझे ..”

झा – “हां तो, वो पुरे देश को पसंद है तो का पूरा देश ही पत्रकार बन जाये ..हाहाहाहाहा”

(तीनों की हंसी पर वो भी मजबूरी में हंसने लगा.).
.
और फिर अगला सवाल आया,

झा– “भारत में पहला कम्युनिस्ट सीएम कौन था?

विशाल -: ”“जी, ई एम एस नम्बूदरीपाद…”“

पाठक :- अच्छा….तो फिर ज्योति बसु कौन थे?” (तीनों मुस्कुराए…)

विशाल –: “जी सर…वो तो पश्चिम बंगाल में सीएम थे, लेकिन नम्बूरीपाद केरल में सीएम थे, देश के पहले नॉन कांग्रेस सीएम, सीपीएम के बड़े नेता थे…

तिवारी :- ”“मालूम है बड़े नेता थे, लेकिन पहले कम्युनिस्ट सीएम ज्योति बसु थे कामरेड…इतना भी नहीं पता है…

विशाल :- ”“पक्का है सर, सौ फीसदी…आप गूगल कर लें…

तिवारी :-”“हाहाहाहाहा…अब पत्रकार गूगल के भरोसे रहेगा तो हो चुका…कई साल रिपोर्टिंग की है हमने…”“

विशाल -सर लेकिन मैं कन्फ़र्म हूं…नम्बूदरीपाद 1957 मेंसीएम बन गए थे, जबकि ज्योति बसु…

झा :- ”“चलिए आपको गूगल ही दिखा देते हैं…”

(तिवारी मुस्कुराया
और पाठक अपने लैपटॉप गूगल करने लगा)..

लेकिन 15 सेकेंड बाद ही उसकाचेहरा अजीब सा हो गया…

पाठक ;- “नम्बूदरीपाद का पूरा नाम क्या था…

विशाल -”“सर…एलमकुलम मनक्कल संकरन नम्बूदरीपाद…

पाठक :- ”“चुनाव कहां से लड़ते थे..

विशाल -.”“कोझिकोड सर…

झा :-”“कितनी बार सीएम बने…

विशाल:- ”“सर पहली बार 1957 से 1959, दूसरी बार 1967 से 69…

तिवारी :-”“अभी कहां है…

विशाल -”“सर…1998 में देहांत हो गया…1909 में पैदा हुए थे शायद…

तीनो गुस्साए और झा बोला ठीक है ठीक है आपका इंटरव्यू ख़त्म होता है आप बाहर बैठिये आपसे मिलके अच्छा लगा कुमार जी

:- “”चपरासी फिर से दरवाज़ा खोलता है और विशाल को लेकर बहार आकर तीसरी आवाज़ लगाता है “”

(दीपाली पाण्डेय कौन है चलिए )

दीपाली (एक मॉडर्न जवाने की लड़की है पर वो interview साड़ी में देने आती है)

“दीपाली खड़ी होके अपनी साड़ी सही कर के अपने सारे सामान को बगल में बैठी एक लड़की को देती है पर उसमे से अपना फ़ोन का रिकॉर्डर on कर के ले जाती है क्योंकि अपनी पहली इंटरव्यू यादे हमेसा अपने साथ रखना चाहती थी और वो फ़ोन लेके रूम में अंदर जाती है ”

जैसे ही वो बैठती है तीनो इंटरव्यू लेने वालो के चेहरे पे मानो ख़ुशी सी छा जाती है

झा:- पाण्डेय जी आप इस साड़ी में बहोत सुन्दर लग रही है

दीपालीथैंक्यू सर

तिवारी -पर दीपाली आज कल के जवाने में ये साडी वारी नहीं चलती पता हीहै

दीपाली -: सर मैं समझी नहीं

पाठक -इनका कहने का मतलब ये है की सनी लियॉन के जवाने में कोई नरगिस को कोई थोडिना पसंद करेगा

(दीपाली सहम सी गई और उसे गुस्सा भी आया )

झा -जरा खड़ी होना तो

दीपाली -सर क्यों ?

झा – खड़ी तो हो

(दीपाली खड़ी होगई)

पाठक– अब जरा पीछे मुह कर के उस और दरवाज़े की तरफ जाओ और फिर वहा से आओ ।
(दीपाली खड़ी रही )

तिवारी झा तेज़ आवाज़ में – सुनाई नहीं देता

(दीपाली डरी हुई जाती है और वापस अति है)

(तीनो घूर के उसको देखते है और हँसते है )

झा – फिगर तो तुम्हारा बहोत अच्छा है

दीपाली -सर ये आप सब इंटरव्यू में क्या अनाब सनाब बक रहे और करवा रहे

तिवारी -अरे जब तुम न्यूज़ रूम में बैठो गी तो दर्शक तुम्हारी आवाज़ सुनने के लिए थोड़ी बैठे गे उन्हें आज कल तो कुछ और दिखाना पड़ता है

ये सुन के dipali को बहोत गुस्सा आया पर उसने खुद पे नियंत्रण रखा

झा तभी अपना पेन टेबल की बाई ओर गिराता है और दीपाली से कहता है

झा– जरा पेन उठा के देनातो

दीपाली खड़ी रही

तिवारी और पाठक- सुनाई नहीं देता है हम क्या कह रहे

दीपाली पेन उठाने को झुकती है

झा – इन दोनों के भी साइज़ सही है सामने से तो नहीं दिख रहे थे ऐसे तो बड़े है

ये बोल के तेज़ से हँसने लगा साथ में तिवारी और पाठक भी पूरा साथ दे रहे थे

तिवारी – जाओ दीपाली जाओ मिल गई तुमको नौकरी जी ले अपनी ज़िन्दगी

ये बोल के फिर से तीनो जोर जोर से हँसने लगे

दीपाली आँखों में आँसू के साथ बहार आती है और अपना फ़ोन लेती है और कही फ़ोन करती है

और फिर अपनी सीट पे आके बैठ जाती है

कुछ देर बाद चपरासी वापस से आता है और एक लिस्ट लेके

चपरासीदीपाली पाण्डेय आपको अंदर बुलाया जा रहा आपको नौकरी के लिए चुन लिया गया है

(दीपाली गुस्से में थी )

विशाल और सूर्यांश समझ गए थे उन्हें ये नौकरी क्यों नहीं मिली क्योंकि आज कल यही चल रहा था लड़कियो को तमाम लालच देके नौकरी पे रखा जा रहा था ”

विशाल – हँस के चलो सूर्यांश मैडम के हुस्न का जादू चल गया ।

ये बोल के विशाल जैसे जा रहा था पुलिस के 5 6 आदमी वहा पहुचे और चपरासी से बोले

पुलिस -ये दीपाली पाण्डेय कोण है

“दीपाली आगे आई ”

दीपाली-मैं हु

(दीपाली ने इंटरव्यू के बाद पुलिस को फ़ोन किया था )

और ये कह के अपना फ़ोन निकाला और “रेकॉर्डिंग्पुलिस को सुनाई

पुलिस ऑफिस में जा के तिवारी झा और पाठक से बातचीत कर के उन्हें पुलिस स्टेशन लेके जाती है

नोट:-

भारतीय दंड संहिता धारा 509, 294 और 354 के अंतर्गत यूं तो महिलाओं को छेड़ना एक आपराधिक मामला है ।।।
हालांकि केवल 1 परसेंट मुल्ज़िमो को सजा होती है ।

पढ़ने के लिए शुक्रिया और जो कुछ गलतिया होगी उसके लिए माफ़ी